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300 मीटर खाई में गई जान, कोर्ट का बड़ा फैसला! मां को मिलेगा 15.76 लाख मुआवजा

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A man died in a 300-meter ditch, the court issued a significant verdict! The mother will receive 15.

सुंदरनगर स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने एक सड़क दुर्घटना मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पीड़ित मां को मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है। अधिकरण ने वाहन मालिक को निर्देश दिया है कि वह हादसे में जान गंवाने वाले 24 वर्षीय युवक की मां को 15,76,400 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। हालांकि इस फैसले में एक अहम कानूनी पहलू भी सामने आया है, क्योंकि अदालत ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है।

यह हादसा 18 मार्च 2023 को हुआ था। जानकारी के अनुसार 24 वर्षीय बहादुर सिंह एक महिंद्रा पिकअप वाहन में सवार होकर जा रहा था। जब वाहन चलौणी के पास पहुंचा तो चालक राजेश कुमार की कथित लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया। देखते ही देखते गाड़ी सड़क से करीब 300 मीटर नीचे गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में बहादुर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

मृतक की मां कमला देवी ने अपने बेटे की असामयिक मृत्यु के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दावा किया कि उनका बेटा परिवार का सहारा था और प्रतिमाह लगभग 25,000 रुपये की आय अर्जित करता था। याचिका में 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत में आय से संबंधित ठोस दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ऐसे में अधिकरण ने हिमाचल प्रदेश के न्यूनतम वेतन नियमों को आधार मानते हुए आय का निर्धारण किया और उसी के अनुरूप मुआवजे की गणना की। सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद अदालत ने 15,76,400 रुपये मुआवजा निर्धारित किया।

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बीमा कंपनी की जिम्मेदारी को लेकर रहा। जांच और सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दुर्घटनाग्रस्त महिंद्रा पिकअप एक मालवाहक वाहन था। मृतक उसमें एक अनाधिकृत यात्री के रूप में सवार था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि माल ढोने वाले वाहन में यात्रियों को बैठाना बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। इसी आधार पर बीमा कंपनी को मुआवजा भुगतान से बरी कर दिया गया। परिणामस्वरूप, पूरी क्षतिपूर्ति राशि वाहन मालिक सह चालक को स्वयं वहन करनी होगी।

अधिकरण ने भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी विशेष निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार कुल मुआवजे का 50 प्रतिशत हिस्सा कमला देवी के नाम पर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के रूप में जमा कराया जाएगा, ताकि उन्हें नियमित ब्याज मिलता रहे और भविष्य सुरक्षित रह सके। शेष 50 प्रतिशत राशि उन्हें सीधे प्रदान की जाएगी।

यह फैसला वाहन मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है कि बीमा नियमों का उल्लंघन भविष्य में गंभीर आर्थिक परिणाम ला सकता है। साथ ही, यह निर्णय पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में न्यायालय की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।